Ganga Dussehra: गंगा दशहरा पर कौन सा खाना बनता है?

दशहरा, जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है, भारत के सबसे महत्वपूर्ण और हर्षोल्लास से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है। यह केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह विविध भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सबसे बढ़कर, लजीज पकवानों का भी उत्सव है! क्या आपने कभी सोचा है कि दशहरा पर कौन सा खाना बनता है जो इस दिन को और भी खास बना देता है? आइए, इस पावन अवसर पर तैयार किए जाने वाले कुछ सबसे पारंपरिक और स्वादिष्ट व्यंजनों पर एक नज़र डालें, जो आपके मुंह में पानी ला देंगे और त्योहार की खुशियों को दोगुना कर देंगे।

गंगा दशहरा पर कौन सा खाना बनता है?

यह त्योहार सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों और रावण दहन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है स्वादिष्ट और पारंपरिक भोजन जो इस दिन तैयार किया जाता है। हर क्षेत्र में दशहरे की अपनी अनूठी पाक परंपराएं हैं, जो भारत की समृद्ध विरासत को दर्शाती हैं।


क्षेत्र-वार विविधता: हर प्रांत का अपना दशहरा स्वाद

भारत की अद्भुत विविधता हमें दशहरा के पकवानों में भी स्पष्ट रूप से देखने को मिलती है। हर प्रांत और समुदाय की अपनी विशिष्ट व्यंजन और प्रथाएं हैं जो इस शुभ दिन पर अपनाई जाती हैं।

उत्तर भारत: पूड़ी-हलवा और मिठाइयों का मेल

  • उत्तर भारत में, दशहरा के दिन कई घरों में गरमागरम पूरी और सूजी का हलवा बनाया जाता है। यह एक क्लासिक और बेहद पसंद किया जाने वाला कॉम्बो है।
  • कुछ स्थानों पर पूरी के साथ आलू की रसेदार सब्जी भी बनती है।
  • मिठाइयों में, जलेबी और लड्डू का विशेष महत्व होता है। कई घरों में चने की दाल का हलवा भी तैयार किया जाता है।
  • नवरात्रि के नौ दिनों के उपवास के बाद, दशहरे पर व्रत खोलने वाले भक्त अक्सर कुट्टू की पूरी, सिंघाड़े के आटे का हलवा और साबूदाने की खिचड़ी जैसे फलाहारी पकवान भी खाते हैं।

पूर्वी भारत (विशेषकर बंगाल): मिष्टी और भोग

  • पूर्वी भारत में, विशेषकर पश्चिम बंगाल में, दुर्गा पूजा का समापन दशहरे (विजयादशमी) पर होता है। इस दिन देवी को विदाई दी जाती है और सिंदूर खेला जाता है।
  • बंगाली घरों में इस दिन खास तौर पर मीठे पकवान जैसे मिष्टी दोई, संदेश, और रसगुल्ला जैसी मिठाइयां बनाई जाती हैं और एक-दूसरे को खिलाई जाती हैं।
  • भोग के रूप में विभिन्न प्रकार की सब्जी (जैसे लौकी या कद्दू की सब्जी), खिचड़ी (विशेष प्रकार की भोग की खिचड़ी), और भाजा (तली हुई सब्जियां) भी प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती हैं।
  • कई स्थानों पर लुची (पूरी का एक प्रकार) और आलू दम का भी चलन है।

पश्चिम भारत (गुजरात, महाराष्ट्र): मीठा और नमकीन का संतुलन

  • गुजरात में, दशहरा पर फफड़ा-जलेबी खाने की एक अनूठी और लोकप्रिय परंपरा है। लोग सुबह-सुबह गरमागरम फफड़ा (नमकीन बेसन का नाश्ता) और जलेबी का नाश्ता करते हैं।
  • महाराष्ट्र में, पूरन पोली, जिसे मीठी रोटी भी कहते हैं, एक बेहद लोकप्रिय व्यंजन है। यह गुड़ और दाल के मिश्रण से बनी एक स्वादिष्ट मीठी रोटी होती है, जिसे घी के साथ परोसा जाता है।
  • इसके साथ ही श्रीखंड और बासुंदी जैसी मिठाइयां भी बनाई जाती हैं, जो दही और दूध से बनी होती हैं।

दक्षिण भारत: पायसम और पुलीओगरे की महक

  • दक्षिण भारत में दशहरा को विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है, और यहाँ इसे विद्यारंभम (ज्ञान की शुरुआत) का दिन भी माना जाता है।
  • इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है। पकवानों में, पुलीओगरे (इमली चावल) और दही चावल मुख्य रूप से बनाए जाते हैं।
  • विभिन्न प्रकार के पायसम (खीर), जैसे कि चावल पायसम, दाल पायसम, या सेवई पायसम, भी लोकप्रिय हैं।
  • सुंदल (उबले हुए चने या दाल का सलाद, जिसमें नारियल और मसालों का तड़का होता है) भी एक आम प्रसाद है जिसे देवी को चढ़ाया जाता है।

त्योहार के पकवानों का महत्व

दशहरा पर बनने वाले ये पकवान केवल पेट भरने के लिए नहीं होते, बल्कि इनका गहरा सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक महत्व भी होता है।

  • ये व्यंजन त्योहार की खुशी और उत्सव के माहौल को बढ़ाते हैं।
  • परिवार के सदस्य एक साथ मिलकर भोजन तैयार करते हैं और उसका आनंद लेते हैं, जिससे रिश्तों में मिठास आती है और बंधन मजबूत होते हैं।
  • कई पकवान देवी-देवताओं को भोग के रूप में भी चढ़ाए जाते हैं, जिससे उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

संक्षेप में, दशहरा पर बनने वाला खाना केवल एक पकवान नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपराओं का एक अभिन्न अंग है, जो स्वाद, आस्था और परिवार के मिलन का प्रतीक है। तो इस दशहरा, इन पारंपरिक पकवानों का आनंद लें, अपने प्रियजनों के साथ खुशियां बांटें और त्योहार की खुशियों को दोगुना करें!

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