Griha Pravesh Muhurat in 2025 | गृह प्रवेश मुहूर्त
2025 में
गृह प्रवेश मुहूर्त:
नया घर… एक सपना
जो अक्सर हकीकत में बदलता है। और जब यह सपना साकार होता है, तो सिर्फ ईंट-गारे से बना ढांचा नहीं, बल्कि खुशियों और उम्मीदों से भरा एक नया संसार आपका इंतज़ार करता है। इसी नए अध्याय को शुरू करने से पहले, हिंदू धर्म में गृह प्रवेश का पवित्र संस्कार बेहद अहम माना जाता है। यह सिर्फ घर में कदम रखना नहीं, बल्कि नकारात्मक ऊर्जाओं को शुद्ध कर, सकारात्मकता को आमंत्रित करने का एक तरीका है। 2025 में अगर
आप अपने सपनों के आशियाने में कदम रखने की सोच रहे हैं, तो सही गृह प्रवेश मुहूर्त चुनना बेहद ज़रूरी है। यह सुनिश्चित करता है कि आप ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के साथ तालमेल बिठा रहे हैं, जिससे आपके नए जीवन की शुरुआत में सौभाग्य और शांति आए।
आइए, इस Griha Pravesh article for 2025 में
शुभ गृह प्रवेश की तिथियों, इसके गहरे महत्व और इस पावन समारोह से जुड़े हर ज़रूरी पहलू को विस्तार से जानें।
गृह प्रवेश क्या है और क्यों है यह इतना खास?
गृह प्रवेश शब्द
दो संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है: ‘गृह’ जिसका अर्थ है घर, और ‘प्रवेश’ जिसका अर्थ है दाखिल होना। यह उस खास अनुष्ठान को दर्शाता है जिसे कोई भी परिवार अपने नए घर में पहली बार प्रवेश करते समय करता है। हमारी पुरानी मान्यताओं के अनुसार, घर केवल दीवारें और छत नहीं है; इसकी अपनी एक अलग ऊर्जा होती है। गृह प्रवेश समारोह का मुख्य उद्देश्य इसी ऊर्जा को शुद्ध करना, अगर कोई नकारात्मकता हो तो उसे दूर करना और उसे घर में रहने वालों के लिए अनुकूल बनाना है।
इस समारोह
का महत्व
कई कारणों
से है:
- सकारात्मकता का संचार: गृह प्रवेश
पूजा से घर
से हर तरह की नकारात्मक
ऊर्जाएं दूर होती हैं और सकारात्मकता का संचार होता है। - समृद्धि और खुशहाली: अनुष्ठानों और मंत्रोच्चार का जाप जीवन के हर
पहलू में समृद्धि लाने के लिए डिज़ाइन किए गए
हैं – चाहे वह
धन हो, स्वास्थ्य हो या रिश्तों में सौहार्द। - ईश्वरीय आशीर्वाद: हम भगवान गणेश (जो हर बाधा को दूर करते हैं), देवी लक्ष्मी (धन और समृद्धि की देवी),
और अन्य महत्वपूर्ण देवी-देवताओं का आह्वान
करते हैं ताकि वे आपके नए
निवास को अपना आशीर्वाद दें। - सुरक्षा कवच: यह समारोह
घर को बुरी शक्तियों और नकारात्मक प्रभावों से बचाता है, जिससे परिवार के सदस्यों
के लिए एक
सुरक्षित और आरामदायक माहौल बनता है। - एक शुभ आरंभ: गृह प्रवेश
नए जीवन की
एक औपचारिक
और आध्यात्मिक
शुरुआत का प्रतीक है, जो घर
में एक शांत और सकारात्मक
वातावरण स्थापित
करता है।
2025 में
गृह प्रवेश के लिए शुभ मुहूर्त: हर महीने की खास तारीखें
हिंदू ज्योतिष में, किसी भी शुभ कार्य के लिए शुभ मुहूर्त का चयन करना बेहद अहम माना जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि आप जो भी काम कर रहे हैं, वह खगोलीय पिंडों और उनकी ऊर्जाओं के साथ पूरी तरह से मेल खाए। 2025 में गृह
प्रवेश के लिए महीने-वार शुभ तिथियां यहाँ दी गई हैं:
जनवरी 2025
- 14 जनवरी, 2025 (मंगलवार): मुहूर्त:
सुबह 07:15 बजे से दोपहर
12:10 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी - 23 जनवरी, 2025 (गुरुवार): मुहूर्त:
सुबह 07:44 बजे से सुबह
10:05 बजे तक, नक्षत्र: मृगशिरा
फरवरी 2025
- 6 फरवरी, 2025 (गुरुवार): रात
10:53 बजे से 7 फरवरी को सुबह
07:06 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी - 7 फरवरी, 2025 (शुक्रवार): सुबह
07:06 बजे से 8 फरवरी को सुबह
07:05 बजे तक, नक्षत्र: मृगशिरा - 8 फरवरी, 2025 (शनिवार): सुबह
07:05 बजे से शाम 06:07 बजे तक, नक्षत्र: मृगशिरा - 14 फरवरी, 2025 (शुक्रवार): रात
11:09 बजे से 15 फरवरी को सुबह
06:59 बजे तक, नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी - 15 फरवरी, 2025 (शनिवार): सुबह
06:59 बजे से रात 11:52 बजे तक, नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी - 17 फरवरी, 2025 (सोमवार): सुबह
06:58 बजे से 18 फरवरी को सुबह
04:53 बजे तक, नक्षत्र: चित्रा
मार्च 2025
- 1 मार्च, 2025 (शनिवार): सुबह
11:22 बजे से 2 मार्च को सुबह
06:45 बजे तक, नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद - 5 मार्च, 2025 (बुधवार): दोपहर
01:08 बजे से 6 मार्च को सुबह
06:41 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी - 6 मार्च, 2025 (गुरुवार): सुबह
06:41 बजे से सुबह 10:50 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी - 14 मार्च, 2025 (शुक्रवार): दोपहर
12:23 बजे से 15 मार्च को सुबह
06:31 बजे तक, नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी - 15 मार्च, 2025 (शनिवार): सुबह
06:31 बजे से सुबह 08:54 बजे तक, नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी
अप्रैल 2025
- 3 अप्रैल, 2025 (गुरुवार): सुबह
06:32 बजे से रात 11:42 बजे तक, नक्षत्र: उत्तरा आषाढ़ - 30 अप्रैल, 2025 (बुधवार): सुबह
05:41 बजे से दोपहर 02:12 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी
मई 2025
- 1 मई, 2025 (गुरुवार): सुबह
11:23 बजे से दोपहर 02:21 बजे तक, नक्षत्र: मृगशिरा - 7 मई, 2025 (बुधवार): शाम
06:17 बजे से 8 मई
को सुबह
05:35 बजे तक, नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी - 8 मई, 2025 (गुरुवार): सुबह
05:35 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक, नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी - 9 मई, 2025 (शुक्रवार): दोपहर
12:09 बजे से 10 मई
को सुबह
05:33 बजे तक, नक्षत्र: चित्रा - 10 मई, 2025 (शनिवार): सुबह
05:33 बजे से शाम 05:29 बजे तक, नक्षत्र: चित्रा - 14 मई, 2025 (बुधवार): सुबह
05:31 बजे से सुबह 11:47 बजे तक, नक्षत्र: अनुराधा - 17 मई, 2025 (शनिवार): शाम
05:44 बजे से 18 मई
को सुबह
05:29 बजे तक, नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा - 22 मई, 2025 (गुरुवार): शाम
05:47 बजे से 23 मई
को सुबह
05:26 बजे तक, नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद - 23 मई, 2025 (शुक्रवार): सुबह
05:26 बजे से रात 10:29 बजे तक, नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद,
रेवती - 28 मई, 2025 (बुधवार): सुबह
05:25 बजे से 29 मई
को रात
12:29 बजे तक, नक्षत्र: मृगशिरा
जून 2025
- 4 जून, 2025 (बुधवार): रात
11:54 बजे से 5 जून को सुबह
03:35 बजे तक, नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी - 6 जून, 2025 (शुक्रवार): सुबह
06:34 बजे से 7 जून को सुबह
04:47 बजे तक, नक्षत्र: चित्रा
जुलाई, अगस्त, सितंबर 2025
इन महीनों (आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन) को आमतौर पर चतुर्मास
की वजह से गृह प्रवेश के लिए शुभ नहीं माना जाता। यह वह अवधि है जब माना जाता है कि देवता विश्राम करते हैं, इसलिए कोई भी नया या बड़ा कार्य शुरू करना उचित नहीं माना जाता। हालांकि, यदि कोई बेहद ज़रूरी स्थिति हो, तो आपको किसी अनुभवी पुजारी से
सलाह लेनी चाहिए, जो आपको विशेष परिस्थितियों में मार्गदर्शन दे सकें।
अक्टूबर 2025
- 23 अक्टूबर, 2025 (गुरुवार): सुबह
04:51 बजे से 24 अक्टूबर को सुबह
06:28 बजे तक, नक्षत्र: अनुराधा - 24 अक्टूबर, 2025 (शुक्रवार): सुबह
06:28 बजे से 25 अक्टूबर को दोपहर
01:19 बजे तक, नक्षत्र: अनुराधा - 29 अक्टूबर, 2025 (बुधवार): सुबह
06:31 बजे से सुबह 09:23 बजे तक, नक्षत्र: उत्तरा आषाढ़
नवंबर 2025
- 3 नवंबर, 2025 (सोमवार): सुबह
06:34 बजे से 4 नवंबर को दोपहर
02:05 बजे तक, नक्षत्र: रेवती - 6 नवंबर, 2025 (गुरुवार): सुबह
03:28 बजे से 7 नवंबर को सुबह
06:37 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी - 7 नवंबर, 2025 (शुक्रवार):): सुबह
06:37 बजे से 8 नवंबर को सुबह
06:38 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा - 8 नवंबर, 2025 (शनिवार): सुबह
06:38 बजे से सुबह 07:32 बजे तक, नक्षत्र: मृगशिरा - 14 नवंबर, 2025 (शुक्रवार): रात
09:20 बजे से 15 नवंबर को सुबह
06:44 बजे तक, नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी - 15 नवंबर, 2025 (शनिवार): सुबह
06:44 बजे से रात 11:34 बजे तक, नक्षत्र: उत्तरा आषाढ़ - 24 नवंबर, 2025 (सोमवार): रात
09:53 बजे से 25 नवंबर को सुबह
06:52 बजे तक, नक्षत्र: रेवती - 29 नवंबर, 2025 (शनिवार): सुबह
02:22 बजे से 30 नवंबर को सुबह
06:56 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी
दिसंबर 2025
- 1 दिसंबर, 2025 (सोमवार): सुबह
06:56 बजे से शाम 07:01 बजे तक, नक्षत्र: मृगशिरा - 5 दिसंबर, 2025 (शुक्रवार): सुबह
06:59 बजे से 6 दिसंबर को सुबह
07:00 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा - 6 दिसंबर, 2025 (शनिवार): सुबह
07:00 बजे से सुबह 08:48 बजे तक, नक्षत्र: मृगशिरा
एक महत्वपूर्ण
बात: ये सभी मुहूर्त के समय आपके शहर और पंचांग की
गणना के आधार पर थोड़े बदल सकते हैं। इसलिए, अपनी स्थिति के अनुसार सबसे सटीक और व्यक्तिगत मुहूर्त
जानने के लिए हमेशा अपने स्थानीय पुजारी या
ज्योतिषी से सलाह लेना ही सबसे बेहतर रहेगा। वे आपकी जन्म कुंडली के अनुसार भी सबसे उपयुक्त समय बता सकते हैं।
गृह प्रवेश समारोह: तैयारी और परंपराएं
एक सफल और शुभ गृह प्रवेश समारोह के लिए कुछ बहुत ही ज़रूरी बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
- घर का पूरा होना: गृह प्रवेश
करने से पहले यह सुनिश्चित
करें कि आपके घर का निर्माण पूरी तरह से
हो गया हो। इसमें दरवाजे,
खिड़कियां, छत, पानी और बिजली का
काम सब कुछ शामिल है। अधूरे घर में प्रवेश को शुभ नहीं माना जाता। - साफ–सफाई और शुद्धिकरण: समारोह से पहले पूरे घर को
अच्छी तरह से
साफ और शुद्ध करें। नकारात्मक
ऊर्जाओं को दूर करने के लिए नमक के पानी से पूरे घर
में पोछा लगाना एक अच्छा तरीका है। - सजावट: अपने घर के
प्रवेश द्वार को
आम के पत्तों और गेंदे के
फूलों के तोरण से सजाएं।
यह शुभता और
स्वागत का प्रतीक है। घर के
फर्श पर एक
सुंदर रंगोली
बनाएं और पूरे घर में दीये या दीपक जलाएं, जो प्रकाश
और सकारात्मकता
का प्रतीक
हैं। - पहला कदम: परिवार का मुखिया, आमतौर पर पति, अपने दाहिने
पैर से पहले घर में प्रवेश करें। उनके हाथों में जल से
भरा एक कलश, एक नारियल
और आम के
पत्ते होने चाहिए। पत्नी को उनके ठीक पीछे बाएं पैर से प्रवेश करना चाहिए। - दूध उबालने का अनुष्ठान: एक नए बर्तन में दूध उबालें जब तक कि
वह उबलकर बाहर न आ जाए। यह घर में बहुतायत, समृद्धि
और भरपूर भोजन का प्रतीक
है, जो भविष्य के लिए अच्छे शगुन के रूप में देखा जाता है। - पूजा सामग्री: भगवान गणेश और
देवी लक्ष्मी
की मूर्तियों
के साथ-साथ फल, फूल, मिठाई, धूप, कपूर और
अन्य पारंपरिक
पूजा सामग्री
तैयार रखें। आपके पुजारी आपको एक
विस्तृत सूची प्रदान करेंगे। - हवन: वातावरण को शुद्ध करने और सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने के लिए हवन (अग्नि अनुष्ठान) करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह नकारात्मकता को दूर करता है और
एक दिव्य वातावरण बनाता है, साथ ही देवताओं
को आहुति भी
प्रदान करता है। - भोजन और आतिथ्य: परिवार के सदस्यों और आमंत्रित
मेहमानों के लिए एक विशेष,
पारंपरिक भोजन तैयार करें। प्रसाद
(पवित्र भोजन) अर्पित करना समारोह
का एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसे सभी को बांटना चाहिए। - रात भर रहना: यह पारंपरिक
रूप से सलाह दी जाती है
कि परिवार
गृह प्रवेश
समारोह के बाद नए घर में रात भर रहे। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा और
गर्माहट बनी रहती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: गृह प्रवेश के लिए आमतौर पर कौन से महीने सबसे अच्छे माने जाते हैं?
A1: गृह
प्रवेश के लिए शुभ महीनों में आमतौर पर माघ (जनवरी-फरवरी), फाल्गुन (फरवरी-मार्च), वैशाख (अप्रैल-मई), ज्येष्ठ (मई-जून), कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) और मार्गशीर्ष (नवंबर-दिसंबर) शामिल हैं।
Q2: सप्ताह के कौन से दिन गृह प्रवेश के लिए शुभ होते हैं?
A2: सोमवार,
बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को आमतौर पर गृह प्रवेश के लिए बहुत शुभ माना जाता है। मंगलवार, शनिवार और रविवार को आमतौर पर टाला जाता है।
Q3: क्या गृह प्रवेश के लिए कोई खास समय या अवधि ऐसी है जिसे टालना चाहिए?
A3: हाँ,
चतुर्मास (लगभग जुलाई से अक्टूबर तक), श्राद्ध
पक्ष (पूर्वजों के लिए अनुष्ठानों की अवधि), अधिक
मास (एक अतिरिक्त चंद्र माह), और सूर्य या चंद्र ग्रहण की अवधि से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, यदि परिवार में हाल ही में कोई दुखद घटना (जैसे मृत्यु) हुई हो या कोई सदस्य गर्भवती हो, तो समारोह को कुछ समय के लिए टालना बेहतर माना जाता है।
Q4: क्या मैं गृह प्रवेश से पहले अपने घर में फर्नीचर रख सकता हूँ?
A4: परंपरागत रूप से, गृह प्रवेश समारोह से पहले घर में बड़े फर्नीचर को स्थानांतरित करने से बचना चाहिए। केवल पूजा से संबंधित आवश्यक वस्तुएँ और गैस चूल्हा ही पहले ले जाए जा सकते हैं।
Q5: क्या गृह प्रवेश के लिए किसी पुजारी का होना अनिवार्य है?
A5: यद्यपि
कुछ अनुष्ठानों को आप स्वयं भी कर सकते हैं, लेकिन एक योग्य पुजारी या
ज्योतिषी का मार्गदर्शन प्राप्त करना अत्यधिक अनुशंसित है। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी अनुष्ठान सही ढंग से हों और आपको अधिकतम लाभ मिले।
Q6: गृह प्रवेश के लिए कौन से नक्षत्र सबसे अच्छे माने जाते हैं?
A6: रोहिणी,
मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, रेवती और उत्तरा भाद्रपद को गृह प्रवेश के लिए अत्यधिक शुभ नक्षत्र माना जाता है।
Q7: गृह प्रवेश के लिए कौन सी मीठी डिश बनानी चाहिए?
A7: खीर
(चावल की खीर) या हलवा पारंपरिक और लोकप्रिय मीठे व्यंजन हैं जिन्हें गृह प्रवेश के दौरान “प्रसाद”
के रूप में तैयार और अर्पित किया जाता है। दूध उबालने का अनुष्ठान (जहां दूध बर्तन से बाहर बहता है) भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, जो समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है।
इस विस्तृत Griha Pravesh article for 2025 की
मदद से, आप अपने नए घर में एक धन्य और समृद्ध शुरुआत सुनिश्चित कर सकते हैं। यह न केवल आपके घर को शुद्ध करेगा, बल्कि आपके परिवार के लिए भी ढेर सारी खुशियां और सकारात्मकता लेकर आएगा।
क्या आपके गृह प्रवेश समारोह के बारे में कोई और सवाल हैं, या आप किसी खास तारीख के लिए और जानकारी चाहते हैं?
Main Prashant hoon, ek passionate architect with 5 years of experience in residential design aur interior decoration. Mera maksad hai logon ko unke sapno ka ghar design karne mein madad karna – simple, stylish aur vastu-friendly tarike se. House Decor Hindi blog ke through main ghar ke interior, design tips aur budget-friendly home decor ideas Hindi mein share karta hoon, taaki har Indian family apne ghar ko khubsurat bana sake.
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