बेडरूम वास्तु: डबल बेड की सही दिशा और शुभ आविष्कार (वास्तु अनुसार)
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बेडरूम वास्तु: डबल बेड की सही दिशा और शुभ आविष्कार (वास्तु अनुसार)

आपने बिल्कुल सही सवाल पूछा है! डबल बेड की सही दिशा और उसका सही आविष्कार (डिज़ाइन) आपकी नींद की गुणवत्ता, स्वास्थ्य और घर की शांति पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, बेडरूम और उसमें रखा गया बेड बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह आपके विश्राम और पुनर्जीवन का स्थल होता है।

चलिए, समझते हैं कि बेडरूम में डबल बेड किस दिशा में होना चाहिए और क्या बातें ध्यान में रखनी चाहिए:

बेडरूम में डबल बेड की श्रेष्ठ दिशा (सबसे अच्छी दिशा)

  1. पूर्व दिशा (East): यह सबसे उत्तम दिशा मानी जाती है बेड के लिए। पूर्व दिशा से सूर्य की प्रगति (सुबह की धूप) की पवित्र ऊर्जा प्राप्त होती है, जो शारीरिक और मानसिक प्रगति, उत्साह और स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है। बेड का सिरहाना (हेडबोर्ड) पूर्व की तरफ होना शुभ माना जाता है।
  2. दक्षिण दिशा (South): यह दूसरी उत्तम दिशा है। दक्षिण दिशा में बेड का सिरहाना रखने से नींद अच्छी आती है और निद्रा गहरी होती है। यह दिशा स्थिरता और सुरक्षा का भाव भी देती है।
  3. उत्तर दिशा (North): उत्तर दिशा को भी अनुकूल माना गया है बेड के लिए। इस दिशा में सिरहाना रखने से मन शांत रहता है और चालक ऊर्जा (ब्रह्मांडीय ऊर्जा) का प्रवाह बेहतर होता है। कुछ वास्तु विद उत्तर दिशा में पैर करने की सलाह देते हैं।

किन दिशाओं में बेड नहीं रखा जाना चाहिए? (बचने वाली दिशाएँ)

  • पश्चिम दिशा (West): पश्चिम दिशा में सिरहाना रखना (हेडबोर्ड पश्चिम में) वास्तु के अनुसार अनुकूल नहीं माना जाता। इससे नींद में अवरोध, मन भारी रहना या स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। अगर कोई और विकल्प न हो, तो सिरहाने को थोड़ा पूर्व की तरफ मोड़कर रखें।
  • ईशान कोण (North-East): ईशान कोण (पूर्व और उत्तर का मिलन) को पूजा स्थल या खुले स्थान के लिए उचित माना जाता है। यहाँ बेड रखने से ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है और घर के मालिक पर अनावश्यक दबाव आ सकता है।
  • आग्नेय कोण (South-East): आग्नेय कोण (दक्षिण और पूर्व का मिलन) अग्नि तत्व का स्थान है। यहाँ बेड रखने से नींद लेने वाला व्यक्ति चिड़चिड़ा या गर्म मिज़ाज का शिकार हो सकता है।

डबल बेड किस तरह का होना चाहिए? (आदर्श डिज़ाइन और विशेषताएँ)

सही दिशा के साथ-साथ, बेड का डिज़ाइन और उसकी बनावट भी उतनी ही महत्वपूर्ण है:

  1. मज़बूत और बिल्कुल सीधा (Solid & Straight): बेड मज़बूत, भारी-भरकम और सीधा होना चाहिए। झुके हुए, टूटे हुए या कमज़ोर फ्रेम से मनोभाव पर बुरा असर पड़ता है और सुरक्षा की भावना कम होती है।
  2. सहज सहयोग के लिए खाली जगह (खुला स्थान): बेड को चारों तरफ (खासकर सिरहाने और पास में) कुछ खाली जगह होनी चाहिए। इससे ऊर्जा का प्रवाह बेहतर होता है और चलने-फिरने में आसानी रहती है। बेड को दीवार से चिपकाकर न रखें।
  3. श्रेष्ठ सिरहाना (मज़बूत हेडबोर्ड): एक मज़बूत और सीधा हेडबोर्ड होना चाहिए, जो दीवार से लगकर हो। यह आधार और सुरक्षा का भाव देता है। खास कर लकड़ी (वुडन) का हेडबोर्ड शुभ माना जाता है।
  4. नीचे खाली जगह (बेड के नीचे का स्थान): बेड के नीचे की जगह साफ-सुथरी और खुली होनी चाहिए। वहाँ कचरा या बेकार चीज़ें जमा नहीं करनी चाहिए। यह ऊर्जा के प्रवाह में अवरोध पैदा करता है।
  5. सही पदार्थ (सामग्री): लकड़ी (विशेषकर शीशम, सागौन) बेड फ्रेम के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है, क्योंकि यह प्राकृतिक और स्थिर होती है। लोहे (मेटल) के फ्रेम भी चल सकते हैं, लेकिन लकड़ी को तरजीह दी जाती है।
  6. आरामदायक गद्दा और बिस्तर (Comfortable Mattress & Bedding): गद्दा (मैट्रेस) आरामदायक और उत्तम गुणवत्ता का होना चाहिए। बिस्तर (बेडिंग) साफ, सुंदर और हल्के, प्रसन्न रंगों के होने चाहिए।

अंतिम बात:

वास्तु के नियम आपको एक शांति, सुरक्षा और ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण बनाने में मदद करते हैं। डबल बेड की सही दिशा पूर्व, दक्षिण या उत्तर में सिरहाना करके और बेड को मज़बूत, सीधा और चारों तरफ खुली जगह वाला चुनकर, आप अपने बेडरूम को एक आदर्श विश्राम स्थल बना सकते हैं। याद रखिए, आपका आराम और मन की शांति सबसे बड़ी सम्पत्ति है। इसे सुधारने के लिए ये सरल वास्तु सुझाव अपनाइए और महसूस कीजिए फर्क!

(आपके बेडरूम के वास्तु और डबल बेड की दिशा से संबंधित कोई और प्रश्न हो तो ज़रूर पूछिए! शुभकामनाएँ!)

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